"सत्यभिव्यक्ति"
"मूरख सदा मूरख रहे धूरत को सच मान,
जो भीड़ जुटाये जन-धन
लूटे बनकर मानव महान,
लोक,लुभावन सपनों से
मोहित होता 'अज्ञान',
आंख खुले तो बहुत
पछतावे जब होवे सत का भान,
मनसा, वाचा, कर्मणा जब हो एक
समान,
तब ही जाकर होता है
विश्व व्यापी कल्यान।"🙏☺️❤️🌹
-------------------------------Narayan
"Jai Shree Mata Ji"
16-08-2022
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