Oneness With Divinity
"This Blog is dedicated to the "Lotus Feet" of "Her Holiness Shree Mata Ji Shree Nirmala Devi" "Who" Incepted and Activated "Sahaj Yoga", An Entrance to the "Kingdom of God" since 5th May 1970.It is Created in June 2010."
Saturday, September 5, 2026
Sahaj Yoga | Part-6 | 9th Workshop on Attention | Kasauli | H.P | 25-27-06-2022
Friday, September 4, 2026
Impulses--682--"मनुष्य के विचित्र तथ्य"
"मनुष्य के विचित्र तथ्य"
"समस्त प्राणियों में सर्वोच्च चेतना धारी मानव ही इतना विचित्र प्राणी है जो स्वयं की अनेको तृष्णाओं की अनंत क्षुधा को तृप्त करने की खातिर।
लाभ-हानि,मान-अपमान रूपी मिथ्या भावनाओं के धागे से बने
कंडीशनिंग रूपी जाल को स्वयं ही बुनता है।
फिर उसमें
स्वेच्छा से फंसता है,और युगों युगों
तक उसमें से बाहर निकलने के लिए छटपटाता रहता है।
फिर सबके सामने
अपने तथाकथित दुखों के पिटारे को खोल खोल कर दिखाते हुए हरदम कहता फिरता है कि
उसकी किस्मत में बहुत सारे कष्ट व परेशानियां लिखें हैं।
जबकि अत्यंत छोटी
चेतना की प्राणी मकड़ी जो अपने शरीर से स्त्रावित होने वाले द्रव्य से जो जाला
बुनती है।
वह केवल भोजन
ग्रहण करने की उसकी नैसर्गिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही बुनती है और स्वयं
अपने बने जाल में कभी फंसती नहीं है।
यदि मानव भी अपनी
स्वाभिक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित रहे।
और उनको पूरा
करने के लिए निर्लिप्त भाव में ईमानदारी,निष्ठा व लगन के साथ कार्य करता रहे तो वह कभी भी दुखी व
पीड़ित नहीं रह सकता।"🙏😌❤️🌹
Wednesday, September 2, 2026
Sahaj Yoga | Z M-78 | Workshop on Attention | Zoom Cloud | 25-07-2020
Tuesday, September 1, 2026
Impulses-682-"श्री माँ कैसे सहज के प्रोटोकॉल स्वयं तुड़वा कर अपने तरीके से अपने कार्य करवाती हैं।"-भाग-3
"श्री माँ कैसे सहज के प्रोटोकॉल स्वयं तुड़वा कर अपने तरीके से अपने कार्य करवाती हैं।"-भाग-3
●न जाने किस कारण से हमारे यह संस्मरण आगे लिखे जाने से छूट गए थे इससे पूर्व का वर्णन हमने 29-08-2019 को किया था।चलो कोई नहीं, यदि छूटा भी है तो इसमें भी जरूर कोई "श्री माँ" की इच्छा रही होगी।
अब प्रयास रहेगा
कि अब तक के हमारे सहज जीवन यात्रा के समस्त उल्लेखनीय संस्मरण आप सभी के समक्ष
प्रस्तुत हो जाएं।●
"कुछ दिन बाद आने
वाले सहजियों के माध्यम से हमारे कानों में कुछ और भी आवाज पड़ने लगी कि:-
2.★सेंटर वाले कहते हैं कि आप गलत ध्यान कराते हैं, और आपका ध्यान कराने का तरीका भी गलत है।★
तब हमने उनसे कहा
कि "श्री माता जी" ने अनेको तरीके बताए हैं शायद उनको एक ही तरीके का
पता होगा इसीलिए वो ऐसा कह रहे हैं।
इन बातों के कुछ
दिन बाद उस शिवमंदिर में हमारी जानकारी के बिना नए नए लोग बनकर कुछ पुराने सेंटर
के सहजी हमारे ध्यान व आत्मसाक्षात्कार के तरीके को चेक करने के लिए समय समय पर
आते रहे और विभिन्न प्रश्न भी करते रहे।
क्योंकि हम सेंटर
के सभी लोगों को अच्छे से पहचानते न थे हम तो बस सहज कार्य में ही निरंतर मगन रहा
करते थे।
एक दिन एक सहजी के द्वारा सेंटर की ओर से इस चेतना के लिए सेंटर अधिकारियों की ओर से सेंटर में उपस्थित होने के लिए फरमान आया।
नियत तिथि व समय पर यह चेतना सेंटर में उपस्थित हुई जो अब कुबेर स्कूल में लगता था।वहां पर लगभग 20 सीनियर सहजी बैठे हुए थे जिनमें से ये चेतना दो-तीन सहजियों को ही पहचानती थी।
हम उनके सामने
जाकर बैठ गए और एक एक करके उन्होंने हम पर ध्यान, ध्यान के तरीकों,प्रोटोकॉल की अवहेलना आदि पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाने प्रारम्भ कर दिए
किन्तु हम बिना किसी प्रतिक्रिया के शांति के साथ सबके आरोप सुनते रहे।
3.★और फिर एक सीनियर सहजी ने हमको सलाह दी कि तुम शिव मंदिर वाला सेंटर बंद कर दो
और सबको यहां आने के लिए बोलो हम वहां से यहां तक की बस लगा देंगे।★
हम उनकी बात
सुनकर बड़े हैरान हुए और फिर हमने कहा कि पहली बात तो ये वो कोई सहज का सेंटर नहीं
है, और दूसरी बात ये कि
ज्यादातर लोग उसी कालोनी के हैं और वो कहीं भी जाने में रुचि नहीं रखते हैं।
फिर हमने उन्हें
कहा आप लोग कैसी नकारात्मक बाते करते हैं "श्री माता जी" तो यह कहती हैं
कि पूरे विश्व में सहज फैलाओ स्थान स्थान पर सामूहिकता कराओ और आप कहते हैं कि
वहां पर ध्यान बंद कर दें।
हम आपकी बातें
माने या "श्री माता जी" की,आप सभी लोग अपने दोनों हाथ खोल कर व चैतन्य को महसूस करते हुए उत्तर दें।
आप लोग कैसे सहजी
हैं जो सहज को बढ़ाने व प्रसारित करने के स्थान पर समाप्त करने की बात करते हैं।
हैरानी की बात है
कि आप लोग तो "श्री माता जी" की बात भी नहीं मानते और सहज चलाने का दम
भरते हैं।
एक संस्मरण
दिसंबर 2001 के याद आ रहा है जब हम
पहली बार मेरठ के अनेकों सहजियों व अपने सहज माध्यम के साथ गणपति पूले पहुंचे हुए थे।
तब "श्री
माता जी" 5-6 दिन तक प्रतिदिन
पूजा पंडाल में रात्रि 8 बजे के करीब आया
करती थीं और प्रातःकाल तक वहां रहा करती थीं।
और उसके
बाद"वे" निर्मल नगरी से 4-5 किलोमीटर पहले गेस्ट हाउस में विश्राम के लिए चली जाय करती थीं।
वहां पर हमें
अन्य स्थानों से आये 20-25 जान पहचान के
सहजी भी मिले वो खाली वक्त में साथ बैठकर साथ साथ ध्यान करना चाहते थे।
एक दिन स्टेज पर
स्टेज के बराबर का बहुत विशाल फ्लेक्स चित्र लगाया गया जिसमें दिखाया गया कि
"श्री माँ" की आंखों में आंसू हैं,उसे देखकर हृदय बड़ा ही द्रवित हुआ।
और उस दिन जब "श्री माता जी" रात्रि में आईं तो अत्यंत उदास व खिन्न दिखाई दीं।हमें याद है उस रात्रि में पंडाल में बैठे हुए सभी सहजियों को बार बार तीव्र निद्रा के झोंके आते रहे।
और हम सभी सहजी
"श्री माँ" के आंसू वाला विशाल पोस्टर देख कर हृदय में "श्री
माँ" से हम लोगों के कारण "उन्हें" होने वाली पीड़ा के लिए बारम्बार
क्षमा मांगते हुए मार्गदर्शन की प्रार्थना करते रहे ताकि हम वह कार्य कर पाएं
जिससे "श्री माँ" प्रसन्न हो जाएं।
अगली रात्रि
में सहज विवाह होने थे,और सुबह ही हमारे साथ मिलने वाले सहजियों ने
हमसे साथ बैठ कर ध्यान करने का पुनः निवेदन किया था।
दोपहर का समय था
और लंच का एनाउंसमेन्ट हो चुका था और भजन गायक श्री आप्टे जी अपना भजन समाप्त कर
चुके थे।
तब हमारे हृदय
में आया कि क्यों न मंच से एक मिनट के लिए माइक मांग कर अपने उन सभी सहजियों को
ध्यान के समय के लिए बता दें क्योंकि वे सभी सहजी भी वहीं पंडाल में उपस्थित थे।
यह विचार कर हम
मंच तक गए और स्टेज पर उपस्थित वालंटियर से
अनाउंस करने की आज्ञा मांगी।
उनके हाँ कहने पर
हमने अनाउंस किया कि जो भी सहजी हमसे मिले थे जो हमारे साथ बैठ कर 'डीप मैडिटेशन' करने के लिए पूछ
रहे थे वह सभी पंडाल के पीछे पहुंच जाएं।
अनाउंस करके हम
पंडाल में पीछे ऊपर की और चढ़कर वापस मुड़े तो क्या देखते हैं कि पूरे पंडाल के सारे
के सारे सहजी एक विशाल समुंदर की लहर के समान ऊपर की ओर उठकर आने लगे।उस वक्त
पंडाल में हजारों सहजी उपस्थित थे।
यह देखकर हम
हैरान रह गए और उनसे मना करने के लिए भाग कर पुनः मंच के पास पहुंचे और माइक लेकर
उन सभी से विनम्रता से कहा कि हम तो केवल अपने जानने वाले कुछ सहजियों के लिए ही
बोल रहे थे इतने सहजी पीछे कैसे आएंगे।
तब उन सबने एक सुर में कहा कि हम भी डीप मैडिटेशन करना चाहते हैं आप हमें भी ध्यान कराइये,हमने कहा कि हम कैसे कराएं इसके लिए तो पूछना पड़ेगा।तब सभी ने एक सुर में कहा कोई नहीं आप कराइये हम उनको बोल देंगे।
उन सभी की मांग के आगे हम अब मजबूर थे, हमने अपने हृदय में "श्री माँ" से कहा "श्री माँ" आपकी जैसी मर्जी।अतः हमने स्टेज पर बैठे स्टेज संचालक से पूछा कि क्या हम ध्यान करा दें तो उन्होंने कहा हां करा दीजिये।
तब "श्री माँ" ने ध्यान के प्रथम दौर में 15 मिनट तक हमारे यंत्र के द्वारा डीप मैडिटेशन का एहसास व इसके तौर तरीकों के ऊपर कुछ ब्रीफिंग करवाई।ताकि सभी का चित्त डीप मैडिटेशन के अगले दौर को ग्रहण करने योग्य हो जाये।
उस समय ऐसा प्रतीत
हो रहा था कि शायद "श्री माँ" हम लोगों के माध्यम से विश्व के सबसे बड़े
सहज-मंच पर 'डीप मैडिटेशन'
पहली बार करवाने जा रहीं थीं।
हमारे सहज माध्यम
के द्वारा करवाये जाने वाले ध्यान के दूसरे दौर के प्रारम्भ होने के 15 मिनट के भीतर ही गाइडिड मैडिटेशन को सुनकर कई
लीडर वहां पहुंच गए और नाराज होते हुए हमसे तुरंत ध्यान बंद करने के लिए कहने लगे।
*उस क्षण 'दिव्य ऊर्जा धाराओं' में सारे पंडाल के सहजी गहन ध्यान की समाधि में डूबे हुए थे।सहस्त्रार व मध्य हृदय में जबरदस्त खिंचाव बना हुआ था,हृदय आनद से लबरेज हो रहा था।
उस वक्त इतनी गहरी शांति थी कि यदि सूई भी गिरे तो उसके गिरने तक कि आवाज भी सुनाई दे सकती थी।हमने उन्हें धैर्य व विनम्रता के साथ पूरा प्रकरण बताया किन्तु वह कुछ भी सुनने को तैयार न थे।
और उन्होंने कहा
कि किसी भी तरह इसे तुरंत रोकने के लिए अनाउंस कीजिये हमने कहा दो चार मिनट में यह
स्वतः हो समाप्त होने ही वाला है।
किन्तु उन्होंने
कुछ भी न सुनते व समझते हुए चलते ध्यान के बीच में ही माइक लेकर सभी को लंच लेने
के लिए अनाउंस करवा दिया।
तब पंडाल में
बैठे हुए समस्त सहजियों ने एक सुर में अभी लंच लेने के लिए मना कर दिया और कहा कि
हमें ध्यान में बहुत आनंद आ रहा था आपने हमें डिस्टर्ब कर दिया।
अतः लीडर मजबूर हो गए और ध्यान का दौर कुछ मिनट और चल कर समाप्त हो गया,सभी सहजियों के चेहरे गुलाब की तरह खिले हुए थे।और उधर वे लीडर अत्यंत खिन्न थे और कह रहे थे कि आपने प्रोटोकॉल तोड़ा है इसकी आप लोगों को सजा मिलेगी।
तब हमने उन सभी से कहा कि हमें हर सजा मंजूर है आप हमें "श्री माता जी" के पास ले चलो।हम चाहते हैं कि हमारे द्वारा संस्था की प्रोटोकॉल तोड़ने के लिए "श्री माता जी" हमें दंडित करें।
हमारी यह बात
सुनकर उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं और वे एकदम से चुप हो गए मानों उन्हें सांप
सूंघ गया हो।
अब वे सभी लाचारी
में एक दूसरे का मुख ताक रहे थे कि आखिर "श्री माता जी" से ध्यान करवाने
की शिकायत किस प्रकार से करें।
तब हमने उनसे कहा
कि यदि वो ऐसा समझते हैं कि हमने गलत किया है तो वे हमें क्यों नही "श्री
माता जी" के पास ले कर चल रहे।
तब हमने कहा कि
ठीक है आप मत ले जाओ हम स्वयं ही "श्री माता जी" के पास चले जाते हैं,
"उनसे" अपने कृत्य की
क्षमा मांग लेंगे।
यह सुनकर वे डर गए और छोड़ो छोड़ो कह कर एक एक करके वहां से चले गए।अब हमने "श्री माता जी" की तरफ पलट कर देखा "वे" मुस्कुराती हुई प्रतीत हुईं।
और जब हमने गौर किया किया तो हम हैरान रह गए, "श्री माता जी" के सिंहासन का हरदम ढाका रहने वाला कपड़ा न जाने कहाँ चला गया था।तब हमने उनके "श्री चरणों" में अश्रुपूरित श्रद्धा,भक्ति व समर्पण के साथ प्रणाम किया।
*"श्री माँ"
ने हमको एहसास करा दिया था कि यह ध्यान "उन्होंने" अपनी उपस्थिति में
स्वयं ही करवाया है।*
'डीप मैडिटेशन'
नाम का शब्द व इस नाम का थोड़ा बहुत वास्तविक
मतलब शायद पहली बार सहजियों को उस दौर में अनुभव हुआ था।
रात्रि में जब
"श्री माँ" आईं तो "वह" अत्यंत प्रसन्न थीं और उस दिन 'अर्धनारीश्वर' वाला अत्यंत मनमोहक आंखों का विशाल पोस्टर लगा था उस पोस्टर
में भी "वे" अत्यंत प्रसन्न नजर आ रहीं थी।
इसके बाद अगले
दिन के सेशन के दौरान उस वक्त के 'World Leader' के द्वारा किये गए अनाउंस मेन्ट को सुनकर दुख से हम सभी
आश्चर्य चकित रह गए।
4.★उन्होंने बोला कि कुछ सहजियों ने प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए मंच पर मार पीट करके
माइक जबरदस्ती छीन कर ध्यान करवाया और सभी सहजियों को 'हिपनोटाइज' किया।
शाम के प्रारंभिक
सैशन में भी उन्होंने पुनः अपनी बात दोहराई तो अगले दिन हम कुछ सहजी उनसे मिलने के
लिए गए और उनको बताया कि जो आपने अनाउंस किया है वह गलत है किंतु वह नहीं माने।
तब हमने उनसे कहा कि यदि हम झूठ बोल रहे हैं तो वे हाथ खोलकर वायब्रेशन चेक कर लें सही गलत पता चल जाएगा।इतना सुनते ही वो आग बबूला हो गए और हम पर बिगड़ पर बोले आप हमें सहज योग समझाएंगे।
तब इस चेतना ने
कहा आपने अत्यंत गलत किया है और सरे आम सफेद झूठ बोला है, "श्री माँ" के द्वारा आपके सामने इसका दुखद
परिणाम जल्द आएगा।★
इतना कह कर दुखी हृदय से हम तो वापस आ गए और अगले दिन अपने अपने स्थानों की ओर रवाना हो गए।आने के 15-20 दिनों के बाद पता चला कि उन्हें "श्री माता जी" ने उनके उस पद से हटा दिया था।
उनको सभी लोग
"श्री गणेश" कहा करते थे और "श्री माता जी" अक्सर मंच पर उनका
हाथ पकड़ कर चला करती थीं।''Impulses🙏😌❤️🌹
Monday, August 31, 2026
Saturday, August 29, 2026
Impulses--681--"Self Knowing is Other's Knowing"
"Self Knowing is Other's Knowing"
"When and until we Acknowledge
Our 'Own Self' properly, we can never know others.
Other wise, we will keep on Imposing our
Notions and Conditioning over others only.
Which has been established into our
Consciousness on Read,Heard,Seen and Mentally understood Information.
This might lead to Myth and suffocate the
Heart of Listeners/Receivers as well as our Heart too.
So it is advisable to convey what we have Felt and Realized inside our 'Own Being' to harmonize their Awareness."🙏😌❤️🌹
------------------------------------Narayan
"Jai Shree Mata Ji"
28-08-2022