"क्या हम अपने घरों पर तिरंगा फहराने के अधिकारी हैं" ?
"क्या हम भारत के आम नागरिक स्वाधीनता दिवस के शुभावसर पर अपने अपने घरों/'स्थानों' पर 'भारत की शान' 'तिरंगे' को फहराने के वास्तव में अधिकारी हैं ?
यकीनन हम साधारण नागरिक भी सेना/पुलिस के
परिसरों/सरकारी प्रतिष्ठानों/स्कूलों/सार्वजनिक स्थलों आदि के अतिरिक्त 'तिरंगे' को फहरा सकते हैं,यदि,
1.हमने/हमारे किसी परिजन ने देश/देशवासियों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की
बाजी लगा कर देश/देश के नागरिकों की रक्षा की हो।
2.हमारे किसी परिवार के सदस्य ने देश की/देश वासियों की रक्षा की खातिर अपने
प्राणों की आहुति दी हो।
3.हमने/परिवार के किसी सदस्य ने देश के संविधान/देश के लोकतंत्र को बचाये रखने
के लिए अपना कोई उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
4.हमने/हमारे किसी परिवार के सदस्य ने अपने किन्हीं सद-कार्यों से देश का नाम
रौशन किया हो।
5.हमने/हमारे परिवार के किसी सदस्य ने देश की अखंडता/आपसी सौहार्द/
प्रेम/संस्कृति/सम्मान को बनाये रखने के लिए जाति/वर्ण/धर्म/स्वर्ण-दलित/अमीर-गरीब/पद/समाजिक-स्तर
आदि का विचार किये बगैर,बिना किसी भी प्रकार
के भेदभाव को माने सभी के लिए समान रूप से कार्य किये हों।
6.हमने/हमारे परिवार के किसी भी सदस्य ने सर्व साधारण मानवों की आंतरिक
जागृति/चेतना स्तर को उन्नत करने के लिए पूर्ण निस्वार्थ भाव से कार्य किया हो।
7.हमने/हमारे परिवार के किसी सदस्य ने पूर्ण निष्ठा,लगन,उत्साह व ईमानदारी के साथ किसी भी रूप में देश सेवा की हो।
हमारा यह 'तिरंगा' शहीदों के खून से
सींचा हुआ है,जो देश/देश के
नागरिकों की भिन्नता/स्वतंत्रता का जीवंत प्रतीक है,यह वास्तव में हमारे देश की 'आत्मा' का साकार रूप ही है।
हमें इसके अस्तित्व का हर हाल में पूरी शिद्दत के साथ सम्मान करना चाहिए।यह किसी भी राजनैतिक दल की महत्वाकांशाओं को पूरा करने का साधन नहीं है।"🙏😌❤️🌹