Thursday, September 10, 2026

Impulses--683--"स्वाभिमान'-पोषण"

 "स्वाभिमान'-पोषण"


"एक जागरूक मानव को अपने 'स्वाभिमान' का पोषण और रक्षा ऐसे ही करना चाहिए जैसे कि हम अपनी संतान के लिए करते हैं।

क्योंकि स्वाभिमान का अभिप्राय हमारे द्वारा हमारे 'स्व' यानि हमारी स्वयं की  'आत्मा' के मान का सम्मान करने से है जो कि "परमात्मा" का अभिन्न अंग है।

यदि हम अपने स्वाभिमान के प्रति पूर्ण रूप से सजग हैं तो हम हमारे भीतर में रहने वाले "ईश्वर" के अंश का पूर्ण श्रद्धा व प्रेम से सम्मान कर रहे हैं जो पूर्णता के पर्याय हैं।

जब हम "परमपिता" को अपनी आत्मा के रूप में अनुभव करने लगते हैं तो हमारे भीतर दाता वाले भाव उत्पन्न होने लगते हैं।

जिसके परिणाम स्वरूप स्वाभिमान परिपक्वता की ओर अग्रसर होने लगता है।तब मानव में 'निर्लिप्तता' रूपी दिव्य गुण पनपने लगता है।

जब निर्लिप्तता प्रगाढ़ होने लगती है तब मानव 'साक्षी' भाव में स्थित हो "प्रभु" की इस रचना का भरपूर आनंद लेने लगता है।

और जब उसकी मानवीय देह के पंचतत्व में विलीन होने का काल निकट आता है तब वह अत्यंत शांति के साथ अपने स्थूल शरीर को पुष्पों की भांति "परमेश्वर" के "श्री चरणों" में अर्पित करते हुए प्रसन्नता के साथ अपनी नश्वर देह का त्याग कर देता है।"🙏😌️🌹

------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"



03-09-2022

Friday, September 4, 2026

Impulses--682--"मनुष्य के विचित्र तथ्य"

"मनुष्य के विचित्र तथ्य"


 "समस्त प्राणियों में सर्वोच्च चेतना धारी मानव ही इतना विचित्र प्राणी है जो स्वयं की अनेको तृष्णाओं की अनंत क्षुधा को तृप्त करने की खातिर।

लाभ-हानि,मान-अपमान रूपी मिथ्या भावनाओं के धागे से बने कंडीशनिंग रूपी जाल को स्वयं ही बुनता है।

फिर उसमें स्वेच्छा से फंसता है,और युगों युगों तक उसमें से बाहर निकलने के लिए छटपटाता रहता है।

फिर सबके सामने अपने तथाकथित दुखों के पिटारे को खोल खोल कर दिखाते हुए हरदम कहता फिरता है कि उसकी किस्मत में बहुत सारे कष्ट व परेशानियां लिखें हैं।

जबकि अत्यंत छोटी चेतना की प्राणी मकड़ी जो अपने शरीर से स्त्रावित होने वाले द्रव्य से जो जाला बुनती है।

वह केवल भोजन ग्रहण करने की उसकी नैसर्गिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ही बुनती है और स्वयं अपने बने जाल में कभी फंसती नहीं है।

यदि मानव भी अपनी स्वाभिक आवश्यकताओं की पूर्ति तक ही सीमित रहे।

और उनको पूरा करने के लिए निर्लिप्त भाव में ईमानदारी,निष्ठा व लगन के साथ कार्य करता रहे तो वह कभी भी दुखी व पीड़ित नहीं रह सकता।"🙏😌️🌹

--------------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"






02-09-2022

Tuesday, September 1, 2026

Impulses-682-"श्री माँ कैसे सहज के प्रोटोकॉल स्वयं तुड़वा कर अपने तरीके से अपने कार्य करवाती हैं।"-भाग-3

 "श्री माँ कैसे सहज के प्रोटोकॉल स्वयं तुड़वा कर अपने तरीके से अपने कार्य करवाती हैं।"-भाग-3

न जाने किस कारण से हमारे यह संस्मरण आगे लिखे जाने से छूट गए थे इससे पूर्व का वर्णन हमने 29-08-2019 को किया था।चलो कोई नहीं, यदि छूटा भी है तो इसमें भी जरूर कोई "श्री माँ" की इच्छा रही  होगी।


अब प्रयास रहेगा कि अब तक के हमारे सहज जीवन यात्रा के समस्त उल्लेखनीय संस्मरण आप सभी के समक्ष प्रस्तुत हो जाएं।


"कुछ दिन बाद आने वाले सहजियों के माध्यम से हमारे कानों में कुछ और भी आवाज पड़ने लगी कि:-


2.सेंटर वाले कहते हैं कि आप गलत ध्यान कराते हैं, और आपका ध्यान कराने का तरीका भी गलत है।


तब हमने उनसे कहा कि "श्री माता जी" ने अनेको तरीके बताए हैं शायद उनको एक ही तरीके का पता होगा इसीलिए वो ऐसा कह रहे हैं।


इन बातों के कुछ दिन बाद उस शिवमंदिर में हमारी जानकारी के बिना नए नए लोग बनकर कुछ पुराने सेंटर के सहजी हमारे ध्यान व आत्मसाक्षात्कार के तरीके को चेक करने के लिए समय समय पर आते रहे और विभिन्न प्रश्न भी करते रहे।


क्योंकि हम सेंटर के सभी लोगों को अच्छे से पहचानते न थे हम तो बस सहज कार्य में ही निरंतर मगन रहा करते थे।


एक दिन एक सहजी के द्वारा सेंटर  की ओर से इस चेतना के लिए सेंटर अधिकारियों की ओर से सेंटर में उपस्थित होने के लिए फरमान आया।


नियत तिथि व समय पर यह चेतना सेंटर में उपस्थित हुई जो अब कुबेर स्कूल में लगता था।वहां पर लगभग 20 सीनियर सहजी बैठे हुए थे जिनमें से ये चेतना दो-तीन सहजियों को ही पहचानती थी।


हम उनके सामने जाकर बैठ गए और एक एक करके उन्होंने हम पर ध्यान, ध्यान के तरीकों,प्रोटोकॉल की अवहेलना आदि पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाने प्रारम्भ कर दिए किन्तु हम बिना किसी प्रतिक्रिया के शांति के साथ सबके आरोप सुनते रहे।


3.और फिर एक सीनियर सहजी ने हमको सलाह दी कि तुम शिव मंदिर वाला सेंटर बंद कर दो और सबको यहां आने के लिए बोलो हम वहां से यहां तक की बस लगा देंगे।


हम उनकी बात सुनकर बड़े हैरान हुए और फिर हमने कहा कि पहली बात तो ये वो कोई सहज का सेंटर नहीं है, और दूसरी बात ये कि ज्यादातर लोग उसी कालोनी के हैं और वो कहीं भी जाने में रुचि नहीं रखते हैं।


फिर हमने उन्हें कहा आप लोग कैसी नकारात्मक बाते करते हैं "श्री माता जी" तो यह कहती हैं कि पूरे विश्व में सहज फैलाओ स्थान स्थान पर सामूहिकता कराओ और आप कहते हैं कि वहां पर ध्यान बंद कर दें।


हम आपकी बातें माने या "श्री माता जी" की,आप सभी लोग अपने दोनों हाथ खोल कर व चैतन्य को महसूस करते हुए उत्तर दें।


आप लोग कैसे सहजी हैं जो सहज को बढ़ाने व प्रसारित करने के स्थान पर समाप्त करने की बात करते हैं।


हैरानी की बात है कि आप लोग तो "श्री माता जी" की बात भी नहीं मानते और सहज चलाने का दम भरते हैं।


एक संस्मरण दिसंबर 2001 के याद आ रहा है जब हम पहली बार मेरठ के अनेकों सहजियों व अपने सहज माध्यम के साथ  गणपति पूले पहुंचे हुए थे।


तब "श्री माता जी" 5-6 दिन तक प्रतिदिन पूजा पंडाल में रात्रि 8 बजे के करीब आया करती थीं और प्रातःकाल तक वहां रहा करती थीं।


और उसके बाद"वे" निर्मल नगरी से 4-5 किलोमीटर पहले गेस्ट हाउस में विश्राम के लिए चली जाय करती थीं।


वहां पर हमें अन्य स्थानों से आये 20-25 जान पहचान के सहजी भी मिले वो खाली वक्त में साथ बैठकर साथ साथ ध्यान करना चाहते थे।


एक दिन स्टेज पर स्टेज के बराबर का बहुत विशाल फ्लेक्स चित्र लगाया गया जिसमें दिखाया गया कि "श्री माँ" की आंखों में आंसू हैं,उसे देखकर हृदय बड़ा ही द्रवित हुआ।


और उस दिन जब "श्री माता जी" रात्रि में आईं तो अत्यंत उदास व खिन्न दिखाई दीं।हमें याद है उस रात्रि में पंडाल में बैठे हुए सभी सहजियों को बार बार तीव्र निद्रा के झोंके आते रहे।


और हम सभी सहजी "श्री माँ" के आंसू वाला विशाल पोस्टर देख कर हृदय में "श्री माँ" से हम लोगों के कारण "उन्हें" होने वाली पीड़ा के लिए बारम्बार क्षमा मांगते हुए मार्गदर्शन की प्रार्थना करते रहे ताकि हम वह कार्य कर पाएं जिससे "श्री माँ" प्रसन्न हो जाएं।


अगली रात्रि में  सहज विवाह होने थे,और सुबह ही हमारे साथ मिलने वाले सहजियों ने हमसे साथ बैठ कर ध्यान करने का पुनः निवेदन किया था।


दोपहर का समय था और लंच का एनाउंसमेन्ट हो चुका था और भजन गायक श्री आप्टे जी अपना भजन समाप्त कर चुके थे।


तब हमारे हृदय में आया कि क्यों न मंच से एक मिनट के लिए माइक मांग कर अपने उन सभी सहजियों को ध्यान के समय के लिए बता दें क्योंकि वे सभी सहजी भी वहीं पंडाल में उपस्थित थे।


यह विचार कर हम मंच तक गए और स्टेज पर उपस्थित वालंटियर से  अनाउंस करने की आज्ञा मांगी।


उनके हाँ कहने पर हमने अनाउंस किया कि जो भी सहजी हमसे मिले थे जो हमारे साथ बैठ कर 'डीप मैडिटेशनकरने के लिए पूछ रहे थे वह सभी पंडाल के पीछे पहुंच जाएं।


अनाउंस करके हम पंडाल में पीछे ऊपर की और चढ़कर वापस मुड़े तो क्या देखते हैं कि पूरे पंडाल के सारे के सारे सहजी एक विशाल समुंदर की लहर के समान ऊपर की ओर उठकर आने लगे।उस वक्त पंडाल में हजारों  सहजी उपस्थित थे।


यह देखकर हम हैरान रह गए और उनसे मना करने के लिए भाग कर पुनः मंच के पास पहुंचे और माइक लेकर उन सभी से विनम्रता से कहा कि हम तो केवल अपने जानने वाले कुछ सहजियों के लिए ही बोल रहे थे इतने सहजी पीछे कैसे आएंगे।


तब उन सबने एक सुर में कहा कि हम भी डीप मैडिटेशन करना चाहते हैं आप हमें भी ध्यान कराइये,हमने कहा कि हम कैसे कराएं इसके लिए तो पूछना पड़ेगा।तब सभी ने एक सुर में कहा कोई नहीं आप कराइये हम उनको बोल देंगे।


उन सभी की मांग के आगे हम अब  मजबूर थे, हमने अपने हृदय में "श्री माँ" से कहा "श्री माँ" आपकी जैसी मर्जी।अतः हमने स्टेज पर बैठे स्टेज संचालक से पूछा कि क्या हम ध्यान करा दें तो उन्होंने कहा हां करा दीजिये।


तब "श्री माँ" ने ध्यान के प्रथम दौर में  15 मिनट तक हमारे यंत्र के द्वारा डीप मैडिटेशन का एहसास व इसके तौर तरीकों के ऊपर कुछ ब्रीफिंग करवाई।ताकि सभी का चित्त डीप मैडिटेशन के अगले दौर को ग्रहण करने योग्य हो जाये।


उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि शायद "श्री माँ" हम लोगों के माध्यम से विश्व के सबसे बड़े सहज-मंच पर 'डीप मैडिटेशन' पहली बार करवाने जा रहीं थीं।


हमारे सहज माध्यम के द्वारा करवाये जाने वाले ध्यान के दूसरे दौर के प्रारम्भ होने के 15 मिनट के भीतर ही गाइडिड मैडिटेशन को सुनकर कई लीडर वहां पहुंच गए और नाराज होते हुए हमसे तुरंत ध्यान बंद करने के लिए कहने लगे।


*उस क्षण 'दिव्य ऊर्जा धाराओं' में सारे पंडाल के सहजी गहन ध्यान की समाधि में डूबे हुए थे।सहस्त्रार व मध्य हृदय में जबरदस्त खिंचाव बना हुआ था,हृदय आनद से लबरेज हो रहा था।


उस वक्त इतनी गहरी शांति थी कि यदि सूई भी गिरे तो उसके गिरने तक कि आवाज भी सुनाई दे सकती थी।हमने उन्हें धैर्य व विनम्रता के साथ पूरा प्रकरण बताया किन्तु वह कुछ भी सुनने को तैयार न थे।


और उन्होंने कहा कि किसी भी तरह इसे तुरंत रोकने के लिए अनाउंस कीजिये हमने कहा दो चार मिनट में यह स्वतः हो समाप्त होने ही वाला है।


किन्तु उन्होंने कुछ भी न सुनते व समझते हुए चलते ध्यान के बीच में ही माइक लेकर सभी को लंच लेने के लिए अनाउंस करवा दिया।


तब पंडाल में बैठे हुए समस्त सहजियों ने एक सुर में अभी लंच लेने के लिए मना कर दिया और कहा कि हमें ध्यान में बहुत आनंद आ रहा था आपने हमें डिस्टर्ब कर दिया।


अतः लीडर मजबूर हो गए और ध्यान का दौर कुछ मिनट और चल कर समाप्त हो गया,सभी सहजियों के चेहरे गुलाब की तरह खिले हुए थे।और उधर वे लीडर अत्यंत खिन्न थे और कह रहे थे कि आपने प्रोटोकॉल तोड़ा है इसकी आप लोगों को सजा मिलेगी।


तब हमने उन सभी से कहा कि हमें हर सजा मंजूर है आप हमें "श्री माता जी" के पास ले चलो।हम चाहते हैं कि हमारे द्वारा संस्था की प्रोटोकॉल तोड़ने के लिए "श्री माता जी" हमें दंडित करें।


हमारी यह बात सुनकर उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं और वे एकदम से चुप हो गए मानों उन्हें सांप सूंघ गया हो।


अब वे सभी लाचारी में एक दूसरे का मुख ताक रहे थे कि आखिर "श्री माता जी" से ध्यान करवाने की शिकायत किस प्रकार से करें।


तब हमने उनसे कहा कि यदि वो ऐसा समझते हैं कि हमने गलत किया है तो वे हमें क्यों नही "श्री माता जी" के पास ले कर चल रहे।


तब हमने कहा कि ठीक है आप मत ले जाओ हम स्वयं ही "श्री माता जी" के पास चले जाते हैं, "उनसे" अपने कृत्य की क्षमा मांग लेंगे।


यह सुनकर वे डर गए और छोड़ो छोड़ो कह कर एक एक करके वहां से चले गए।अब हमने "श्री माता जी" की तरफ पलट कर देखा "वे" मुस्कुराती हुई प्रतीत हुईं।


और जब हमने गौर किया किया तो हम हैरान रह गए, "श्री माता जी" के सिंहासन का हरदम ढाका रहने वाला कपड़ा न जाने कहाँ चला गया था।तब हमने उनके "श्री चरणों" में अश्रुपूरित श्रद्धा,भक्ति व समर्पण के साथ प्रणाम किया।


*"श्री माँ" ने हमको एहसास करा दिया था कि यह ध्यान "उन्होंने" अपनी उपस्थिति में स्वयं ही करवाया है।*


'डीप मैडिटेशन' नाम का शब्द व इस नाम का थोड़ा बहुत वास्तविक मतलब शायद पहली बार सहजियों को उस दौर में अनुभव हुआ था।


रात्रि में जब "श्री माँ" आईं तो "वह" अत्यंत प्रसन्न थीं और उस दिन 'अर्धनारीश्वर' वाला अत्यंत मनमोहक आंखों का विशाल पोस्टर लगा था उस पोस्टर में भी "वे" अत्यंत प्रसन्न नजर आ रहीं थी।


इसके बाद अगले दिन के सेशन के दौरान उस वक्त के 'World Leader' के द्वारा किये गए अनाउंस मेन्ट को सुनकर दुख से हम सभी आश्चर्य चकित रह गए।


4.उन्होंने बोला कि कुछ सहजियों ने प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए मंच पर मार पीट करके माइक जबरदस्ती छीन कर ध्यान करवाया और सभी सहजियों को 'हिपनोटाइज' किया।


शाम के प्रारंभिक सैशन में भी उन्होंने पुनः अपनी बात दोहराई तो अगले दिन हम कुछ सहजी उनसे मिलने के लिए गए और उनको बताया कि जो आपने अनाउंस किया है वह गलत है किंतु वह नहीं माने।


तब हमने उनसे कहा कि यदि हम झूठ बोल रहे हैं तो वे हाथ खोलकर वायब्रेशन चेक कर लें सही गलत पता चल जाएगा।इतना सुनते ही वो आग बबूला हो गए और हम पर बिगड़ पर बोले आप हमें सहज योग समझाएंगे।


तब इस चेतना ने कहा आपने अत्यंत गलत किया है और सरे आम सफेद झूठ बोला है, "श्री माँ" के द्वारा आपके सामने इसका दुखद परिणाम जल्द आएगा।


इतना कह कर दुखी हृदय से हम तो वापस आ गए और अगले दिन अपने अपने स्थानों की ओर रवाना हो गए।आने के 15-20 दिनों के बाद पता चला कि उन्हें "श्री माता जी" ने उनके उस पद से हटा दिया था।


उनको सभी लोग "श्री गणेश" कहा करते थे और "श्री माता जी" अक्सर मंच पर उनका हाथ पकड़ कर चला करती थीं।''Impulses🙏😌️🌹




----------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"






01-09-2022

Saturday, August 29, 2026

Impulses--681--"Self Knowing is Other's Knowing"

"Self Knowing is Other's Knowing"

 

"When and until we Acknowledge Our 'Own Self' properly, we can never know others.

 

Other wise, we will keep on Imposing our Notions and Conditioning over others only.

 

Which has been established into our Consciousness on Read,Heard,Seen and Mentally understood Information.

 

This might lead to Myth and suffocate the Heart of Listeners/Receivers as well as our Heart too.

 

So it is advisable to convey what we have Felt and Realized inside our 'Own Being' to harmonize their Awareness."🙏😌️🌹

------------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"




28-08-2022 

Wednesday, August 26, 2026

Impulses--680--"Responsibilities of Enlightened Ones"

 "Responsibilities of Enlightened Ones"

 

1.To Maintain Inner Exploration for the upgradation of their Awareness.

 

2.To Help True Seekers in their Seeking with their Own Experiences and Feelings.


3.To Become the Medium of Conveying messages of 'Divine' to Eligible and Desreving Ones.


4.To Support Desired Ones to make them a Good Medium.

 

5.To Work Regularly against all Anti Human, Anti Nature and Anti God Elements Individually/Collectively with their Attention/ Awareness/ Pure Will till their Complete Extinction."🙏😌️🌹


------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"


26-08-2022

Monday, August 24, 2026

Impulses--679-- "विचार की पांच अवस्थाएं"

 "विचार की पांच अवस्थाएं"

 

"ईश्वर" का विचार हमें 'निर्विचार' अवस्था प्रदान करता है,


"ईश्वर" का 'आभास' हमें 'अविचार' स्थिति में पहुंचा देता है,

 

"ईश्वर" का 'सानिग्ध्यय' हमें 'विचार रहित समाधि' में प्रवेश दिला देता है,

 

"ईश्वर" में समाने के उपरांत हर प्रकार के विचारों का पूर्णतया अभाव हो जाता है,


और "ईश्वर" से पूर्ण 'ऐकारिता' अनेको प्रकार के कल्याण कारी विचारों को उत्पन्न करती है।"🙏😌️🌹


------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"




24-08-2022

Thursday, August 20, 2026

Impulses--678--"सत्यभिव्यक्ति"

 "सत्यभिव्यक्ति"


"मूरख सदा मूरख रहे धूरत को सच मान,

 

जो भीड़ जुटाये जन-धन लूटे बनकर मानव महान,

 

लोक,लुभावन सपनों से मोहित होता 'अज्ञान',

 

आंख खुले तो बहुत पछतावे जब होवे सत का भान,

 

मनसा, वाचा, कर्मणा जब हो एक समान,

 

तब ही जाकर होता है विश्व व्यापी कल्यान।"🙏️🌹

-------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"






16-08-2022

Tuesday, August 18, 2026

Impulses--677--"Religious Practices Hardly Leads To Truth"

 "Religious Practices Hardly Leads To Truth"


"All kinds of Religious Practices are done out off Fear/Demand/ Greed/Rituals/Tradition/Show Offs only.

 

Nobody can get any kind of actual benefit except Mental Satisfaction by doing all such things.


Because "God" Recognizes Compassionate/Loving/Innocent

/Unbiased/Simple/Honest and Good Hearted People only.

 

Who use to have True Love for Humanity and "His" Creation without discrimination.

 

"He" Accepts all Aesthetic Wishes and Desires of such people for the Benevolence of the whole Globe as their 'Pujas'."🙏😌️🌹

--------------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"



03-08-202

Sunday, August 16, 2026

Impulses--676--"क्या हम अपने घरों पर तिरंगा फहराने के अधिकारी हैं" ?

"क्या हम अपने घरों पर तिरंगा फहराने के अधिकारी हैं" ?


"क्या हम भारत के आम नागरिक स्वाधीनता दिवस के शुभावसर पर अपने अपने घरों/'स्थानों' पर 'भारत की शान' 'तिरंगे' को फहराने के वास्तव में अधिकारी हैं ?

 

यकीनन हम साधारण नागरिक भी सेना/पुलिस के परिसरों/सरकारी प्रतिष्ठानों/स्कूलों/सार्वजनिक स्थलों आदि के अतिरिक्त 'तिरंगे' को फहरा सकते हैं,यदि,


1.हमने/हमारे किसी परिजन ने देश/देशवासियों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा कर देश/देश के नागरिकों की रक्षा की हो।

 

2.हमारे किसी परिवार के सदस्य ने देश की/देश वासियों की रक्षा की खातिर अपने प्राणों की आहुति दी हो।

 

3.हमने/परिवार के किसी सदस्य ने देश के संविधान/देश के लोकतंत्र को बचाये रखने के लिए अपना कोई उल्लेखनीय योगदान दिया हो।

 

4.हमने/हमारे किसी परिवार के सदस्य ने अपने किन्हीं सद-कार्यों से देश का नाम रौशन किया हो।

 

5.हमने/हमारे परिवार के किसी सदस्य ने देश की अखंडता/आपसी सौहार्द/ प्रेम/संस्कृति/सम्मान को बनाये रखने के लिए जाति/वर्ण/धर्म/स्वर्ण-दलित/अमीर-गरीब/पद/समाजिक-स्तर आदि का विचार किये बगैर,बिना किसी भी प्रकार के भेदभाव को माने सभी के लिए समान रूप से कार्य किये हों।

 

6.हमने/हमारे परिवार के किसी भी सदस्य ने सर्व साधारण मानवों की आंतरिक जागृति/चेतना स्तर को उन्नत करने के लिए पूर्ण निस्वार्थ भाव से कार्य किया हो।

 

7.हमने/हमारे परिवार के किसी सदस्य ने पूर्ण निष्ठा,लगन,उत्साह व ईमानदारी के साथ किसी भी रूप में देश सेवा की हो।

 

हमारा यह 'तिरंगा' शहीदों के खून से सींचा हुआ है,जो देश/देश के नागरिकों की भिन्नता/स्वतंत्रता का जीवंत प्रतीक है,यह वास्तव में हमारे देश की 'आत्मा' का साकार रूप ही है।

 

हमें इसके अस्तित्व का हर हाल में पूरी शिद्दत के साथ सम्मान करना चाहिए।ह किसी भी राजनैतिक दल की महत्वाकांशाओं को पूरा करने का साधन नहीं है।"🙏😌️🌹

-----------------------------Narayan 

"Jai Shree Mata Ji"




13-08-2022

Friday, August 14, 2026

Impulses--675--"Horoscope"

 "Horoscope"

 

"Considering Horoscope in Present Life for decision making especially for Marriage Purpose go against the Natural Flow of Life.

 

Because Horoscope belongs to Past, use to be based on the Karmic Cycles of Previous Births.

 

It shows the Probabilities on the Basis of the Calculation of the Grid Reference of the Planets right at the time of Birth.

 

But it often gets changed as per our Deeds of Present Life.

 

Which use to be capable to change the Consideration of all the Calculations and Predictions.

 

So it is advisable to rely upon the Merits and Inspiration of your Heart only.

 

When ever you are going to Consider your would be Spouse or going to take some Important decisions.

 

Otherwise, you might miss the Opportunity and you will definitely regret Later.

 

If some of you have been granted Self Realization by "Shree Mata Ji" then It is absolutely useless even to think about Horoscope.

 

Because the Law of Permutation & Combination has been put on Re-Set by "Her" as per your Enlightenment and Internal Awakening.

 

That's why, there is no need to go into the Subtleties of Horoscope which might make your life very complicated because your Agnya will be at War.

 

And you won't be able to Surrender into 'Lotus Feet' as well as you will never achieve the state of 'Nirvikalpa' which very essential for Spiritual Growth.

 

What ever will happen in our life, will definitely happen in the Presence of 'Divine'.

 

Then why to waste our Energy and the Most Precious Time in worrying about the consequences of our Planetary Status as per the so called prediction of our Horoscope instead of maintaining Thoughtless Meditative State.

 

We should never be worried about the Consideration of the Karmas of our Previous Births, because we can't alter them.

 

But we must be quite conscious about our Present which are going to help us in our Evolution and Transformation.

 

It is up to us how we take Astrology in our life, we may vary in our Awareness and Deep Understanding regarding any Aspect.

 

For me Astrology has no significance, though I had gone through it as my hobby before surrendering into "Shree Lotus Feet", it used to be a fun for me.

 

But now, one thing I consider only, how much deep I can go Inside my 'Own self' to discover my 'True self' and share the experiences of Inner Exploration among Co-Walkers.

 

So let us enjoy our Individual Journey of the in2visible 'Kingdom of God' Collectively by Joining our Sahastrara, Central Heart, Attention, Awareness,Soul and Spirit together."🙏😌️🌹-

-------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"



02-08-2022


Thursday, August 13, 2026

Impulses--674--"Finding "God" Through Feelings"

 "Finding "God" Through Feelings"


"No one in this world can find "God" with all kinds of External Activities like Dancing/Recitation of Mantras/Singing of Bhajans/Performing Religious Rituals/Doing Different kinds of Yoga etc.


But, these things may Enhance your Concentration of your Mind and Attention.

 

The Most Simple & Easy way to find "Him" is,

 

To Feel/Realize the Rhythm of Heart Beat/Pulsation of Nerves/Going and Coming 'Prana' in Respiration in the Beginning.

 

Because "He" is there to run and keep Active "His" Best Creation by providing "His" Power Supply.

 

"He" will soon begin Manifesting into your Being in the form of 'Unique Energy' of Different Kinds of Intensities & Frequencies."🙏🏻😌️🌹

-------------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"






01-08-2022

Sahaj Yoga | Part-1 | 9th Workshop on Attention | Evil's Hunters | Kasauli | H.P | 25-27-06-2022

"How to Get Answer from our Own Spirit"


 

Wednesday, August 12, 2026

Impulses-- 673--"Realization of Spirit is Must"

"Realization of Spirit is Must"


"When and until we Realize our Own Spirit within our Own Being.

 

We always remain trapped into the Severe Grip of our Mind.

 

And then we keep on Behaving like a Slave of what we know Mentally.

 

After that, we often go against Humanity, Nature and of Course against "God" too."🙏️🌹

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"Jai Shree Mata Ji"





31-07-2022

Tuesday, August 11, 2026

Impulses--672-- "Confusion"

 "Confusion"


"Confusion is none other than 'Fusion of Myth' into our Consciousness.

 

Which Compel our Brain to follow 'Untruth' by working under the Undue Influence of our Mind instead of our Heart."🙏️🌹

--------------------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"





30-07-2022

Monday, August 10, 2026

Video-Sahaj Yoga | Z M-75 | Workshop on Attention | Evil's Hunters | Zoom | 11-07-2020

"Post Meditation Conversation"




Impulses--671-"Ego"

 "Ego"


"Ego is nothing but a 

Bundle of  Acknowledgements,

of

Ideas,

Thoughts,

Knowledge,

Recognition,

Designation,

Attainments,

Attachments,

 Achievements,

Informations, 

Identification,

  and of course the Possession of some 

Worldly Articles 

into our Mind only."🙏️🌹

---------------Narayan

"Jai Shree Mata JI"


29-07-2022

Saturday, August 8, 2026

Impulses--670--"गहनता प्राप्ति के मुख्य अवरोध"

 "गहनता प्राप्ति के मुख्य अवरोध"

 "यह देखा गया है कि अनेको वर्षों के पुराने सहजियों में भी गहनता परिलक्षित नहीं होती।

 

वे अनेको पूजा व सेमिनार्स में भी शामिल होते रहते हैं, बिना नागा सेंटर्स भी जाते हैं,अपने यन्त्र की क्लीयरिंग में भी काफी समय लगाते हैं,ध्यान के लिए अच्छा खासा समय देते हैं।

 

किन्तु न जाने फिर भी उनके भीतर गहनता क्यों नहीं स्थापित जो पाती ?

 

इतने लंबे काल के बाद भी अभी तक उनका स्तर क्यों कर उथला व हल्का नजर आता है ?

 

इस वर्ग में आने वाले कुछ सहजी तो वे हैं जिनको समय समय पर "श्री माँ" के साक्षात सानिग्धय का सुअवसर तक मिला है।

 

यही नहीं ध्यान के समय अक्सर उनको अपनी कुंडलिनी सहस्त्रार पर अच्छे से अनुभव देती है और वायब्रेशन भी खूब आते हैं।

 

किन्तु फिर भी उनके भीतर गहनता व स्थित-प्रज्ञता की स्थापना नहीं हो पाती।छोटी छोटी विपरीत बातों,स्थितियों, परिस्थितयों से उनका सन्तुलन तुरंत ही बिगड़ जाता है।

 

कई कई दिन तक उनका ध्यान ठीक प्रकार से लग नहीं पाता और न ही ध्यान के मतलब की मनोस्थिति ही बन पाती है।

 

और रात दिन वे किन्ही बाधाओं के बारे में ही चिंतित रहते हुए स्वयं से ही संघर्ष करते रहते हैं।आखिर ऐसे कौनसे ऐसे कारण हैं ?

 

जो उनके लम्बे काल से "श्री चरणों" में होने के वाबजूद भी उनके अन्तःकरण में वांछित आनंद में बने रहने की स्थिति से वंचित कर रहे हैं।

 

हमारी चेतना व आंतरिक समझ के अनुसार गहनता में उन्नति न होना का मुख्य कारण हैं उनकी चेतना का अच्छे से विकसित न हो पाना।

 

यदि हम इसे आसानी से समझना चाहें तो कह सकते हैं कि,

 

*उनकी कुंडलिनी भले ही ध्यान के दौरान उनके सहस्त्रार पर आरूढ़ रहे किन्तु उनकी चेतना नीचे के 6 चक्रों में से किसी न किसी अथवा किन्हीं चक्रों के गुण-दोषों में फंसी रहती है।*

 

होता यह है कि,अधिकतर सहजी ध्यान अवस्था के दौरान अपने दोनों हाथों में वायब्रेशन्स को महसूस करते हुए अपनी कुंडलिनी को अपने सहस्त्रार पर पाकर सन्तुष्ट हो जाते हैं।

 

किन्तु इसी सुंदर अवस्था के दौर का आनंद लेने के बाद अपने स्वयं के आंतरिक अस्तित्व को जानने के लिए कोई भी प्रयास तक नहीं करते।

 

और न ही अपने भीतर में रहने वाली अनेको विभूतियों यानि अपनी जीवात्मा,अपनी आत्मा,अपने समस्त देवी-देवताओं,आदि गुरुओं के साथ कोई सम्पर्क ही साधने का प्रयत्न ही करते हैं।

 

नतीजन, उनका आंतरिक ज्ञान उनकी स्वयं की चेतना में न तो प्रगट ही हो पाता है और न ही अन्य सहजियों के लिए प्रस्फुटित ही हो पाता है।

 

जिसके परिणाम स्वरूप वे अपने स्वयं के 'आत्मज्ञान' से वंचित रहते हैं जो उनकी चेतना में गहनता प्रदान करने में सक्षम हो सकता है।

 

ध्यान के हजारों दौर के बाद भी उनकी चेतना उनके किसी न किसी चक्र के गुण-दोषो में लिप्त रहने के कारण उन्नत नहीं हो पाती।

 

और न वे स्वयं भी कभी ध्यानस्थ अवस्था में अपने आत्म-चिंतन/आत्म-विश्लेषण/आत्म-निरीक्षण के दौर के द्वारा उन गुण-दोषो से निर्लिप्त रहने का प्रयास ही करते हैं।

 

वरन, वे अक्सर अपने किन्ही चक्रों की अड़चनों को नकारात्मकता का प्रभाव मानते हुए 'सफाई-अभियान' में लगे रहते हैं।

 

इस तथ्य को समस्त चक्रों के देवताओं के विपरीत कार्य करने वाली मनो दशाओं के कुछ उदाहरणों से भी समझ सकते हैं :-

 

1.अब जैसे कोई सहजी किसी न किसी कारण से जाने-अनजाने में झूठ,चालाकी,छल,फरेब,दिखावे आदि का सहारा लेता है।

 

तो उसका मूलधार ही नहीं अपितु सभी चक्रो के देवता निश्चित रूप से अप्रसन्न ही रहेंगे परिणाम स्वरूप उसके सभी चक्र समय समय पर पकड़ते रहेंगे।

 

2."माँ सरस्वती व ब्रहम्मा जी" के द्वारा उचित कार्यों के माध्यम से रोजी रोटी को चलाने/चेतना के कार्यो को आगे बढ़ाने के लिए जो गुण प्रदान किया है।यदि कोई उसका दुरुपयोग करेगा तो उसका स्वाधिष्ठान चक्र कभी भी ठीक नहीं रहेगा।

 

3.यदि किसी सहजी में भौतिक/आध्यात्मिक स्तर पर किसी भी प्रकार की असन्तुष्टि विद्यमान रहेगी तो उसकी नाभि हर हाल में जकड़ती रहेगी।

 

4.यदि कोई सहजी सांसारिक/आध्यात्मिक क्षेत्र में अपने पद/प्रतिष्ठा/पैसे का अभिमान/दुरुपयोग करते हुए किसी अन्य की चेतना पर शासन करने का प्रयास करेगा तो उसका हृदय निश्चित रूप से बाधित होगा।

 

5.यदि कोई सहजी किसी के प्रति दूषित/द्वेष भावना रखने के साथ साथ स्वयं साक्षी भाव की वहेलना करते हुए किसी अन्य सहजी में दोष भाव रोपित करने का प्रयास करेगा/करता है, तो उसकी विशुद्धि गड़बड़ ही रहेगी।

 

6.यदि कोई सहजी अन्यों मानवों के प्रति जात-पांत,अमीर-गरीब,स्वर्ण-दलित,ऊंच-नीच,पदस्थ-अपदस्थ व  धर्म के आधार पर भेद-भाव करता है तो उसका आगन्या कभी भी ठीक नहीं रह सकता।

 

और साथ उसे "श्री महादेव" के साथ साथ सभी देवी-देवताओं,रुद्रों,गणों,आदि गुरुओं की नाराजगी भी झेलनी पड़ेगी।

 

7.यदि किसी भी सहजी का "परमात्मा"/"श्री माँ" पर पूर्ण विश्वास नहीं है।और न ही वह अपने अस्तित्व व अपने अस्तित्व से जुड़े संसार को "उनके" "श्री चरणों" में अर्पित करता है।तो उसके सहस्त्रार व मध्य हृदय के साथ जुड़ाव बनाये रखने में सदा अड़चन बनी ही रहेगी।

 

अब इसके दूसरे पक्ष के चिंतन की ओर चलते हैं:

 

यानि कोई सहजी आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त होने के कुछ काल बाद अपने किसी चक्र के प्रगट हुए गुण को "श्री माता जी" का आशीर्वाद मानते हुए उसमें पूरी तरह लिप्त होकर उसी में सदा डूबा रहता है।

 

यानि अपने उसी गुण के माध्यम से पद/ पैसा/प्रतिष्ठा/प्रसिद्धि/प्रशंसा/पहचान बनाये रखने में ही लगा रहता है तो उसकी भी चेतना 'आत्म-ज्ञान' से पुष्ट नहीं हो पाती।

 

परिणाम स्वरूप वह जो भी ज्ञान अन्य सहजियों से शेयर करता है वह उसके स्वयं का अनुभव किया हुआ कम, उधार का, यानि,देखने/सुनने/पढ़ने व मानसिक रूप से समझने के द्वारा अर्जित किया हुआ ज्यादा होता है।

 

जिसके कारण उस शेयरिंग में उसके आत्मज्ञान से प्रस्फुटित होने वाली 'पवित्र ऊर्जा' की नगण्यता रहती है।

 

जिसकी वजह से अन्य लीगों की कुण्डलनियाँ उसकी अपनी स्वयं की ऊर्जा से उठ नहीं पाती।परिणाम स्वरूप उसकी कुंडलिनी को अन्य उठी हुई कुण्डलीनियों से प्रेम व शक्ति नहीं मिल पाती।

 

जबकि ऐसे सहजियों के यन्त्र का प्रयोग कर "श्री माँ" लोगों को समय समय पर आत्मसाक्षात्कार भी प्रदान करती रहती हैं।

 

किन्तु ऐसे सहजी नए व पुराने सहजियों को गहन ध्यान में उतारने का माध्यम तब तक नहीं बन सकते।

 

जब तक वे शुद्ध इच्छा व तीव्र लगन के साथ अपनी चेतना को विकसित करने के लिए अपनी गहनता में उतर कर अपने 'स्व' के साथ एकाकारिता स्थापित नहीं कर लेते।"🙏😌️🌹

----------------------------------Narayan

"Jai Shree Mata Ji"



11-07-2022