"दूषित मन सड़े फल जैसा"
"जिस प्रकार से जल से भरे पात्र में फल डालने पर सड़े हुए फल अच्छे फलों को छोड़कर स्वतः ही जल की सतह पर आ कर छंट जाते हैं।तब उन खराब फलों को कूड़ेदान में फेंक दिया जाता है ताकि वे अन्य फलों को खराब न कर सकें।
ठीक वैसे ही ईर्ष्या,धूर्तता,स्वार्थ, अहंकार,घृणा,झूठ,बेईमानी,दिखावा,दोहरेपन व मक्कारी रूपी सड़न से आच्छादित मन स्थिति वाले मनुष्य विपरीत परिस्थिति व विषम काल में स्वतः ही सबके सामने अनावृत हो जाते हैं।
ऐसी स्थिति में उन विकृत मानसिकता वाले लोगों को अपने जीवन से तुरंत दूर कर देना चाहिए।अन्यथा सच्चे,सरल,ईमानदार,अच्छे व सत्य-राहियों को इनके कारण अनेको प्रकार के कष्ट उठाने पड़ सकते हैं।"
---------------------Narayan
"Jai Shree Mata Ji"
05-09-2022
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