"This Blog is dedicated to the "Lotus Feet" of "Her Holiness Shree Mata Ji Shree Nirmala Devi" "Who" Incepted and Activated "Sahaj Yoga", An Entrance to the "Kingdom of God" since 5th May 1970.It is Created in June 2010."
Wednesday, March 23, 2022
Sahaj Yoga(Video)-Part 32, '8th Workshop on Attention', Varanasi, U.P 05-01-2020
Tuesday, March 22, 2022
"Impulses"--584-- "पुण्य अर्जन"
"पुण्य अर्जन"
"बहुत से लोग 'पुण्य' कमाने के लिए हर वर्ष सावन के महीने में अपनी मन्नतों को पूरा करने की इच्छा रखने वाले कांवड़ियों के लिए भोजन की व्यवस्था करते हैं।
*क्यों न ये कैम्प लगाने वाले लोग कुछ दिन के लिए इन धरनारत किसानों के भोजन आदि की व्यवस्था में सहयोग करके 'महापुण्य' कमाएं।*
*हम सबको यह एहसास करना चाहिए कि "परमात्मा" 'स्वयम' पांचो तत्वों के देवताओं के द्वारा इन 'माँ' स्वरूप धरतीपुत्रों के रूप में हमारे भोजन का प्रबंध कर रहे हैं।*
ये अन्नदाता उन कांवड़ यात्रियों व श्रद्धालुओं से काफी ऊंचा स्थान रखते हैं क्योंकि ये आमजन का पेट भरने की व्यवस्था करते हैं जिनका हम ऋण भी नहीं उतार सकते।
बड़े ही दुख की बात है कि स्वार्थ,अहंकार व घोर अज्ञानता के चलते सरकारें पुलिस,प्रशासन व अर्धसैनिक बलों के द्वारा इन 'अन्नदाताओं' को पीड़ा पहुंचा रही हैं।
*सबको समझना चाहिए कि जो इन 'देव तुल्य जनो' को कष्ट पहुंचाएगा तो "माँ अन्नपूर्णा" रुष्ट हो जाएंगी और वह एक दिन भोजन ग्रहण करने की क्षमता से भी महरूम हो जाएगा।*
*महीनों तक बिस्तर पर पड़ा पड़ा सड़ता रहेगा और मौत भी नजदीक आने से कतरायेगी।इन अन्नदाताओं को तकलीफ देने का मतलब महापाप का भागी बनना है।*
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"Jai Shree Mata Ji"
06-12-2020
Monday, March 21, 2022
Sahaj Yoga(Video)-Part-31, '8th Workshop on Attention', Varanasi, U.P 05-01-2020
Saturday, March 19, 2022
"Impulses"--583--"अति महत्वकांशी सदा हानिकारक"
"अति महत्वकांशी सदा हानिकारक"
*जो भी मनुष्य बिना अपने विवेक का उपयोग किये किसी अति महत्वाकांशी व्यक्ति की विचारधाराओं का अंधानुकरण करने लगते हैं।*
*तो वे किसी गडरिये के द्वारा हाँकि जाने वाली भेड़-बकरियों के समान ही होते हैं।*
क्योंकि जब वह गड़रिया उन्हें चराने ले जाता है तो अज्ञानता के कारण वे भेड़-बकरियां उस गडरिये को ही अपना 'पालनहार' मान बैठती हैं।
और इसी अंधविश्वास के कारण उसके इशारों पर आंख मूंद कर चलना प्रारम्भ कर देती हैं।
*और एक दिन यही गडरिया उन भेड़-बकरियों को कुछ धन के बदले कसाई के हवाले करके चला जाता है।*
यहां तक कि वह अपने भोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए उनको अपने घर में लाकर जिबह करने में भी परहेज नहीं करता।
*दुर्भाग्य से आंख मूंद कर चलने की आदत के कारण भेड़-बकरियों को इस बात का एहसास तब तक नहीं होता जब तक उनकी गर्दन पर छुरी नहीं चल जाती।*
इसीलिए यदि किसी की बातों/विचारधाराओं का अनुसरण करने की इच्छा हो तो उस मानव के कार्यों को एक बार अपने हृदय की कसौटी पर कस कर जरूर देख लेना चाहिए।
क्योंकि अति महत्वकांशी कभी भी किसी का हितैषी नहीं हो सकता वह तो अपनी अतृप्त इच्छाओं को पूरा करने के लिए अपनो तक को नहीं बख्शता।"
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"Jai Shree Mata Ji"
05-12-2020
Wednesday, March 16, 2022
Sahaj Yoga(Video)-Part-30, '8th Workshop on Attention', Varanasi,U.P 05-01-2020
Tuesday, March 15, 2022
"Impulses"--582-- "परम से जुडना स्वसन जितना सरल"
"परम से जुडना स्वसन जितना सरल"
"ईश्वर" से जुड़ने के लिए किसी भी प्रकार के बाहरी कार्यों व उपक्रमों की कोई आवश्यकता ही नहीं है।
*"उनसे" सम्पर्क में बने रहना तो इतना आसान है जितना कि सांस लेना।*
जैसे 'श्वसन' एक स्वाभिक व स्वतः घटित होने वाली प्रक्रिया है जिसमें कुछ भी करने की आवश्यकता ही नहीं होती।
ठीक वैसे ही "परमात्मा" को महसूस करना भी उतना ही सरल व सुगम है,
*बस जरूरत है तो केवल "उनको" अपनी चेतना में महसूस करने की।*
*यह बिल्कुल ऐसा ही है जैसे कोई नन्हा बालक अपने 'माता-पिता' के बारे में सोचता रहता है व उनके स्नेह को अपने हॄदय में महसूस करता रहता है।*
"परमपिता" से एकरूप होने के लिए संसार में जितनी भी विधियां अपनाई जाती हैं वे मात्र मानव-मन को एकाग्र करने के लिए ही हैं।"
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"Jai Shree Mata Ji"
04-12-2020