"This Blog is dedicated to the "Lotus Feet" of "Her Holiness Shree Mata Ji Shree Nirmala Devi" "Who" Incepted and Activated "Sahaj Yoga", An Entrance to the "Kingdom of God" since 5th May 1970.It is Created in June 2010."
Monday, February 21, 2022
Sahaj Yoga(Video)-Part-21 '8th Workshop on Attention', Varanasi, U.P 04-01-2020
Friday, February 18, 2022
"Impulses"--573-- "ईर्ष्यालु मानव रेबीज ग्रसित स्वान सम"
"ईर्ष्यालु मानव रेबीज ग्रसित स्वान सम"
"ईर्ष्यालु व्यक्ति,रेबीज ग्रस्त कटखने 'शवान' जैसा ही होता है ,जो बिन बात के सभी को काटने दौड़ता रहता है।
जिसकी लार भी यदि किसी पहले से लगी खरोंच पर लग जाय तो रेबीज होने का भय उत्पन्न हो जाता है।
तो ऐसे शवान से लोग दूर ही भागते है और यदि वह निकट आ जाये तो उसे डंडा या ईंट मार कर दूर भगा देते हैं।
इसीलिए यदि आप अपने जीवन में सुख,चैन,शांति व आनंद के साथ रहना चाहते हैं तो ईर्ष्यालु मनुष्यों से सदा दूरी बना कर रखे।
यदि ऐसे लोग जबरदस्ती किसी न किसी बहाने से आपके नजदीक आने का प्रयास करें तो उनसे किसी भी तरह से दूरी बनाकर कर रखनी चाहिएं।
अगर दूरी बनाने से भी काम सिद्ध न हो पाए तो ऐसे लोगों से सम्बन्ध ही समाप्त कर लेने चाहिएं।
वर्ना ऐसी दुरात्माओं से संक्रमित होकर आप स्वम् को व स्वयं के द्वारा अपने नजदीकियों को भी हानि पहुंचा सकते हैं।"
-------------------------------------Narayan
"Jai Shree Mata Ji"
24-11-2020
Thursday, February 17, 2022
Sahaj Yoga(Video)-Part-20,'8th Workshop on Attention',Varanasi,U.P 04-012020
Wednesday, February 16, 2022
"Impulses"--572--"एक संतान भगवान् की "
"एक संतान भगवान् की"
"परमेश्वरी" ने प्रसन्नता पूर्वक "अपनी इच्छा" से इस संसार की रचना की है और "श्री पार ब्रह्म परमेश्वर" के 'अंश' हम सभी को मानव देह में जन्म दिया है।
संसार को बनाये रखने की "उनकी" इच्छा का सम्मान करने के लिए मानव का कर्तव्य बनता है कि वह पूर्ण श्रद्धा,भक्ति,निष्ठा व समर्पण के साथ सन्तति प्राप्ति अवश्य करे।किन्तु ध्यान देने योग्य बात यह है कि मानव को केवल एक ही सन्तान की कामना करनी चाहिए।
*क्योंकि एक सन्तान "ईश्वर" की इच्छा का परिणाम होती और एक से ज्यादा सन्तान केवल और केवल 'मोह' का ही प्रतिनिधित्व करती हैं।*
एक से ज्यादा बच्चे होने पर माता-पिता भी किसी न किसी के एक बच्चे के साथ जाने-अनजाने में भेद भाव पूर्ण व्यवहार कर ही देते हैं।और बच्चे भी आपस में किसी न किसी बात पर बचपन से बड़े होने तक झगड़ते ही रहते हैं। जिससे घर की शांति छिन्न-भिन्न होती रहती है।
यदि मानव अपनी एक संतान को केवल "भगवान" की अमानत मान कर उसका लालन पालन करे,तो न तो उस बच्चे के प्रति कभी मोह उपजेगा और न ही वह बच्चा भी कभी अपने आप को उपेक्षित महसूस कर पीड़ित ही होगा और अनावश्यक धनार्जन की लिप्सा भी न होगी।"
-----------------------------------Narayan
"Jai Shree Mata Ji"
23-11-2020
Tuesday, February 15, 2022
Sahaj Yoga(Video)-Part-19, '8th Workshop on Attention', Varanasi, U.P 04-01-2020
Saturday, February 12, 2022
"Impulses"--571-- "बाह्य धर्म मात्र एक मार्ग"
"बाह्य धर्म मात्र एक मार्ग"
"संसार में आज लगभग 222 प्रकार के धर्मों/मतों का अनेकों लोगों के द्वारा अनुसरण किया जा रहा है जो अपने 'स्थापना काल' में "परमात्मा" से जुड़ने के मार्ग माने जाते रहे हैं।
और इन सभी बाह्य धर्मो/मतो के प्रति अनुयाइयों की जड़ता होने के कारण ही आज विश्व में लगभग सभी स्थानों पर धार्मिक झगड़े होते रहते हैं।
जबकि समस्त सद्गुरुओं/सन्तो/"ईश्वर" के अवतारों' ने कभी भी किसी भी बाह्य धर्म का पालन करने की बात नहीं की और न ये कभी भी किसी भी धार्मिक स्थान पर ही गए।
*इन सभी ने तो केवल और केवल अपने 'हृदय' में ही "परमात्मा" को नित्य खोजने व अनुभव करने पर ही बल दिया।*
*दुर्भाग्य से हम जिस मार्ग को भी अपना कर नियमबध्द तरीके से उसका पालन करने लगते हैं तो संस्कारों का जन्म होता है और ये पूर्व संस्कार ही वर्तमान काल में उपलब्ध "परमपिता" से मिलने नहीं देते।*
यदि हम वास्तव में "भगवान" को पाना चाहते हैं तो अपने 'स्वयं' के हृदय में उतर कर सीधे,सरल व स्वाभिक रूप से "उनको"अनुभव करना होगा जैसे कि अपने किसी 'परम मित्र' के प्रेम को हम स्मरण करने के साथ साथ अनुभव करते हैं।"
----------------------------------Narayan
"Jai Shree Mata Ji"
22-11-2020